मैं सतेन्द्र हूँ
मैं कोई डॉक्टर नहीं हूँ।
मैं कोई मनोचिकित्सक नहीं हूँ।
मैं किसी डिग्री या बड़े नाम के साथ यह जगह नहीं चला रहा।
मैं बस एक इंसान हूँ
जिसने बहुत से लोगों को
अंदर ही अंदर टूटते देखा है।
मैंने देखा है कि
लोग हँसते हुए भी दुखी होते हैं,
भीड़ में रहते हुए भी अकेले होते हैं।
उनके पास कहने को बहुत कुछ होता है,
लेकिन सुनने वाला कोई नहीं होता।
कभी परिवार समझ नहीं पाता,
कभी दोस्त व्यस्त होते हैं,
कभी समाज सवाल पूछता है
और कभी डर चुप करा देता है।
Satendra Sathi
यहीं से पैदा हुआ।
यह कोई बिज़नेस आइडिया नहीं था।
यह कोई कमाई की योजना नहीं थी।
यह एक सवाल था
जो मेरे मन में बार-बार आता था:
अगर कोई बस बैठकर
बिना जज किए
किसी की बात सुन ले
तो क्या उसका बोझ थोड़ा कम नहीं हो जाएगा?
मैंने यह जगह इसलिए बनाई
ताकि कोई यह न कहे:
“मेरे पास कहने को बहुत कुछ था
पर कोई सुनने वाला नहीं था।”
यहाँ आप
अपनी समस्या भी कह सकते हैं,
अपनी खुशी भी बाँट सकते हैं,
अपनी उलझन भी,
और अपनी चुप्पी भी।
मैं आपकी बात का समाधान बेचने का वादा नहीं करता।
मैं यह नहीं कहता कि
मैं आपकी ज़िंदगी बदल दूँगा।
मैं बस इतना कहता हूँ:
मैं आपकी बात सुनूँगा।
पूरी ईमानदारी से।
पूरे ध्यान से।
बिना मज़ाक, बिना जजमेंट।
यहाँ आप ग्राहक नहीं हैं।
यहाँ आप सिर्फ एक इंसान हैं।
और इंसान को
कभी-कभी
बस एक सुनने वाला चाहिए होता है।
अगर आप बोलना चाहते हैं,
अगर आपका मन भारी है,
या फिर आप बस
किसी से दिल की बात करना चाहते हैं—
तो
Satendra Sathi
आपके लिए है।
आप अकेले नहीं हैं
— सतेन्द्र